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मंगलवार, 30 नवंबर 2021

एड्स जानकारी लक्षण इलाज बचाव उपाय : AIDS Information Symptoms Treatment and Protection Tips

 हमारे इस सांसारिक वातावरण में लाखों बीमारियां है। कुछ बीमारियां मौसमी होती है और सामान्य उपचार से वे ठीक हो जाती है और कुछ बीमारियां जटिल होती है जिनको लम्बे इलाज और ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। वही कुछ बीमारियां तो ऐसी होती है जिनका उपचार ना केवल मुश्किल बल्कि लाइलाज होता है। ऐसी ही गंभीर बिमारियों में आती है एड्स। आइये एड्स के बारे में जानकारी देते हैं कि आखिर यह बीमारी क्या है यह कैसे फैलती है। इसके लक्षण क्या है। इसका उपचार क्या है। और इसके लिए क्या सावधानी रखी जा सकती है।

एड्स जानकारी

एड्स जानकारी (World AIDS Day)

एड्स (AIDS) का पूर्ण रूप है -  Acquired Immune Deficiency Syndrome. एड्स बीमारी का नाम है और जिस वायरस से यह बीमारी फैलती है वह HIV. एचआईवी (HIV) का पूर्ण अर्थ है - human immunodeficiency virus. कहने का अर्थ है HIV ही वह वायरस है जो इस बिमारी को जन्म देता है। HIV विश्व में दो प्रकार का पाया जाता है। HIV-1 व HIV-2.  भारत में HIV-1 के मरीज मिलते हैं। जबकि HIV-2 अफ़्रीकी देशों के लोगों में ज्यादा पाया जाता है।  

एड्स के लक्षण (Symptoms of AIDS) 
एड्स में सामान्यत: वैसे तो कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है। किन्तु जिस व्यक्ति को एड्स होता है। समय के साथ उसमें कमजोरी आने लगती है या फिर वह धीरे धीरे कई बिमारियों का शिकार होने लगता है। 
हर व्यक्ति में यह बीमारी के लक्षण उसकी उम्र के हिसाब से तथा वह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखता है। इस पर भी निर्भर करता है। यदि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखता है। पौष्टिक भोजन लेता है तथा कसरत वगैरह करता है। तो उसके स्वास्थ्य पर HIV वायरस का असर धीरे धीरे होता है।
ब्लड टेस्ट से ही पता चलता है कि व्यक्ति को एड्स है या नहीं। किन्तु हर कोई व्यक्ति तो अपना ब्लड टेस्ट नहीं करवाता है। 
सामान्यतः किसी भी व्यक्ति के HIV पॉजिटिव का पता तब चलता है। जब या तो वह किसी को रक्तदान करता है। उस रक्तदान के समय स्क्रीनिंग टेस्ट होता है।  पहले एलिजा टेस्ट होता था। किन्तु एलिजा टेस्ट में जो मरीज विंडों पीरियड (हाल ही में संक्रमित व्यक्ति जिस पर वायरस ने अभी कोई प्रभाव दिखना शुरू नहीं किया है) में होते थे उनका पता नहीं चलता था। आज कल नेट टेस्टिंग व स्क्रीनिंग टेस्टिंग से या आसानी से पता चल जाता है।
World AIDS Day

एड्स होने के कारण

HIV वायरस मुख्यतः तीन प्रकार से इंसान के अंदर आता है।
1 असुरक्षित यौन सम्बन्ध
2 संक्रमित सुई का इस्तेमाल करने से
3 जन्म के दौरान संक्रमित माँ से बच्चे में

इन सब में जो सबसे बड़ा कारण है वह एक से ज्यादा व्यक्ति के साथ शारीरिक सम्बन्ध है। आज के दौर में लड़के लड़कियां एक व्यक्ति से शारीरिक सम्बन्ध ना रखकर कई व्यक्तियों से सम्बन्ध बनाते हैं। ऐसा करना एड्स को सीधा सीधा निमंत्रण है।

पहले जब एलिजा टेस्ट होता था तो कोई डोनर जो एड्स के विंडो पीरियड में होता था वह शुरूआती जांच में पकड़ाई में नहीं आता था और हॉस्पिटल स्टाफ द्वारा संक्रमित खून ही जरूरतमंद मरीज को चढ़ा दिया जाता था। इस कारण से भी एड्स फैला है हालांकि अब ब्लड का स्क्रीनिंग टेस्ट या नेट टेस्टिंग होती है। जिसमें विंडो पीरियड का भी साफ साफ पता चल जाता है।

ऐसी ही स्तिथि संक्रमित माँ के साथ थी यदि पता ना चले कि जच्चा एड्स पीड़ित है तो यह बीमारी बच्चे में भी चली जाती थी। पहले बता दिए जाने पर हॉस्पिटल स्टाफ इसका पूरा ध्यान रखता है और बहुत हद तक जन्म देने पर भी माँ से बच्चे को HIV वायरस नहीं जाता है। 
AIDS Information

एड्स से जुड़ी भ्रांतियां बचाव व इलाज

हर एक बीमारी को लेकर जनमानस में कही प्रकार की भ्रांतियां फ़ैल जाती है। जैसे 80 के दशक में जब पहली बार इस बीमारी के बारे में पता चला तो लोगों में कहीं साड़ी अफवाहें फ़ैलने लगी। 
1 लोग हाथ मिलाने से डरने लगे उन्हें लगा की HIV छूने से फैलता है। जब की एड्स स्किन तो स्किन होने की कोई संभावना मात्र नहीं है। किन्तु अफवाह के कारण HIV संक्रमित व्यक्ति को एक प्रकार दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा।
2 साथ में खाना खाने से या झूठा खाने से एड्स फैलता है। कुछ लोगों में यह भ्रांतियां भी फैली। जिन लोगों के घर में या रिश्तेदारी में HIV संक्रमित व्यक्ति होते थे। वे इस बात को लेकर बड़े भ्रमित थे। और पीड़ित व्यक्ति से एक प्रकार से दुराचार करते रहे।
3 तौलिया या अन्य चीज उपयोग करने से। कुछ लोगों को यह भी मानना था कि यदि एड्स पीड़ित व्यक्ति किसी चीज का उपयोग कर ले। तो उस चीज का प्रयोग किसी और को नहीं करना चाहिए इससे एड्स फैलता है। जबकि ऐसा कहीं कुछ नहीं है।

एड्स का कोई इलाज अभी तक सामने नहीं आया है इसके बचाव ही दरअसल इसका इलाज है। भ्रांतियों को दूर रखते हुए यदि एड्स पीड़ित व्यक्ति व उसके परिजन कुछ बातों को ध्यान रखे तो एड्स पीड़ित व्यक्ति भी काफी अच्छे से एक सामान्यः ज़िन्दगी जी सकता है।
1 सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एड्स पीड़ित व्यक्ति से यौन सम्बन्ध ना बनाये। इसके लिए जरूरी है कि यदि आप ऐसे व्यक्ति से रिश्ते कायम करने जा रहे हैं। जिससे आप परिचित नहीं है तो कंडोम का इस्तेमाल करें या अपने साथी से कंडोम का इस्तेमाल करवाएं। वरना आपका जीवन निश्चित रूप से खतरे में रहेगा। आपको एड्स होने की सम्भावना बन जाती है।
2 जब भी आप ब्लड का आदान प्रदान करें उसका स्क्रीनिंग टेस्ट करवाएं। स्क्रीनिंग टेस्ट में संक्रमित रक्त का बड़े ही आसानी से पता चल जाता है।
3 यदि HIV संक्रमित है तो इस बात को प्रेगनेंसी के वक्त डॉक्टर को अवश्य बता दें तथा प्रेगनेंसी पीरियड के दौरान डॉक्टर के बताये अनुसार खान पान का ध्यान रखे व डॉक्टर भी प्रेगनेंसी के वक्त आपका और आपके बच्चे का पूरा ख्याल रखेंगे।

यदि आप या आपका कोई करीबी HIV पॉजिटिव मिलता है तो पैनिक ना करें। क्योंकि पैनिक होने से कई नेगटिव थॉट्स दिमाग में आते हैं। ऐसे कही लोग है जो एचआइवी पॉजिटिव है फिर भी एक सामान्य जीवन जी रहे हैं। यदि एक बार मरीज के दिमाग में नेगेटिविटी फ़ैल गई तो स्तिथि और गंभीर हो जाती है। ऐसी स्तिथि में उस व्यक्ति की सेहत बद से बदतर होती चली जाती है। यदि व्यक्ति उचित खान पान रखे और शारीरिक गतिविधियां जारी रखे तथा समय पर एड्स रोगी को दी जाने वाली दवाइयां लेता रहे है तो वह लम्बे समय तक जीता है और एक सामान्य जीवन जीता है।

एड्स से सुरक्षा व सहायता के लिए हर गृह जिले में ART सेंटर बने हुए हैं। वहां HIV पॉजिटिव व्यक्ति को इस प्रकार की दवाइयां दी जाती है जो वायरल लोड को कम करती है साथ ही यदि उस व्यक्ति को कोई अन्य बीमारी होती है तो उससे उभारने में भी उसकी सहायता करती है। 

संक्षेप 
एड्स एक बीमारी है किसी प्रकार सामाजिक दाग धब्बा नहीं है। कोई भी रोगी यह बताने में हिचके नहीं कि वह HIV ग्रस्त है। उसकी यह थोड़ी सी सावधानी और खुलापन समाज में और भी जागरूकता लेकर आएगा। 

एड्स की जागरूकता के लिए प्रत्येक वर्ष 1 दिसंबर को एड्स जागरूकता दिवस भी  मनाया जाता है। ताकि लोग एड्स जैसे लाइलाज बीमारी के प्रति जागरूक हों और जो भ्रांतियां लोगों के दिमाग में इस बिमारी को लेकर है उसे दूर कर सके। पढ़े और शेयर करें -  एड्स जागरूकता नारे

1 December बाद ही 2 दिसंबर को प्रदुषण नियंत्रण दिवस भी मनाया जाता है। प्रदुषण भी कहीं प्रकार की बिमारियों के लिए उत्तरदायी होता है। अतः आप इसके लिए भी सावधान रहे और लोगों में इसके प्रति भी जागरूकता फैलाएं।  पढ़े और शेयर करें - पर्यावरण प्रदूषण नारे 

वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण देश की ही नहीं पूरे विश्व के सामने सबसे बड़ी समस्या है। यह भी पूरे विश्व के सामने एड्स की तरह लाइलाज हो गया है। बढ़ाते प्रदूषण से एक नहीं सैकड़ों बीमारियां होती है। पढ़े और शेयर करें - पर्यावरण प्रदूषण कविता

अतः आप इस संसार में व्याप्त बीमारियों से ना केवल अपनी सुरक्षा करें बल्कि अपने परिवार व स्वजनों की भी रक्षा करें।





रविवार, 8 अगस्त 2021

खून साफ कैसे करें : How to Refresh Blood in Hindi | Purification of Body

रक्त हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण पदार्थ है। जो हमारे पूरे शरीर में संचरण करता है। इसका स्वच्छ और स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। आइये जानते हैं। ब्लड प्यूरीफिकेशन क्यों जरूरी है और ब्लड को साफ करने के लिए हम क्या क्या कर सकते हैं।

खून साफ कैसे करें

खून ही हमारे शरीर का वह तत्व है। जो पोषक तत्वों को प्रत्येक अंग में पहुंचाता है। आप जानते हैं हम जब भोजन करते हैं तो भोजन में कहीं सारे तत्व होते हैं जैसे विटामिन, प्रोटीन्स, वसा, लवण इत्यादि। ये सभी तत्व हमारे अंगों में ब्लड के माध्यम से पहुंचते हैं।
खून साफ कैसे करें



हमारे शरीर में हार्ट के अलावा किडनी और लिवर भी शरीर में प्यूरीफिकेशन का काम करते हैं और यह सभी कार्य व ब्लड के माध्यम से ही करते हैं। यदि हमारा ब्लड साफ होता है तो लिवर और किडनी भी सेहतमंद हो जाते हैं। 

अशुद्ध ब्लड के कारण चेहरे पर मुँहासे, कीलियां निकलना, झाइयां पड़ना, फुंसिया होना आदि होते हैं। इसके अतिरिक्त शरीर में खुजली चलना, दाद खाज होना आदि शिकायते होती है। ब्लड शुद्ध ना होने पर इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है। यही नहीं लिवर, किडनी व हार्ट की भी उम्र काम होती जाती है।

How to Refresh Blood in Hindi

ब्लड को स्वच्छ करने के कुछ ऐसे उपाय आपको बता रहे हैं जो आसानी से आप घर पर कर सकते हैं।

1 - सबसे पहला व आसान तरीका है आप नीम का नई पत्तियां ले जो अभी अभी आई है। जो रेड हैं या जिन पर हल्का हल्का रेडनेस हैं। तथा साथ ही उन 10-15 पत्तियों के साथ एक खीरा ले। और इन को एक साथ ग्राइंडर में पीस लें। फिर इसमें एक गिलास पानी डाल के फिर उसे अच्छे से मिक्स कर दें। अब आप इसे खाली पेट सुबह सुबह लेंवे। ऐसा आप सप्ताह में एक बार करते हुए 5 - 6 सप्ताह तक करें। आपका रक्त शुद्ध हो जायेगा। आप चाहे तो सीधा कुछ नीम की पत्तियां भी चबा सकते हैं और ऊपर से 1 गिलास पानी पी सकते हैं।

2 - आप रत को कुछ आंवले भीगों कर रखें फिर सुबह उन्हें चबाएं और ऊपर से एक गिलास पानी पी लें। या फिर आंवले को काट कर पीस लें और थोड़ा जीरा पीसकर उसमें मिला दे। इसके बाद 1 गिलास पानी के साथ इसे घोट लें और पी जायें।  ऐसा आप सप्ताह में एक बार करते हुए 5 - 6 सप्ताह तक करें। आपका रक्त शुद्ध हो जायेगा।

3 - आप अर्जुन की छाल का काढ़ा तैयार करें। अर्जुन की छाल का पॉवडर आपको पंसारी की दूकान पर मिल जायेगा। आप चाहे तो रात को 1 गिलास दूध में अर्जुन की छाल पाउडर डालकर रात को ले सकते हैं। यह भी आपके खून को काफी अच्छे से साफ कर देगा। 


और यदि ये सब नहीं करना चाहते तो आप सप्ताह में  उपवास रखें और दिन आप भोजन को कोई अंश ना लें अपितु रसदार फलों का सेवन करने विशेषकर वे फल जिनमें विटामिन C की मात्रा ज्यादा होती है।

खून की सफाई कैसे करें

तो इस प्रकार हम कई तरीकों से अपने ब्लड को स्वच्छ कर सकते हैं। ब्लड हमारे शरीर में सबसे उपयोगी तरल पदार्थ है। इसके बिना जीवन संभव नहीं और इसका साफ़ रहना बहुत जरूरी है। 




साफ़ ब्लड हमारे जीवन में एक नई ऊर्जा भरेगा। हमारे शरीर को स्वस्थ रखेगा। शरीर में एक प्रकार की चमक लाएगा।

ध्यान रहे हम समय पर रक्तदान भी अवश्य करें। रक्तदान से हमारा खून पतला होता है। जिससे हम हृदय, किडनी और लिवर की बिमारियों से बचते हैं। 

आपके और भी रक्तसाफ या खून से जुड़े अन्य सुझाव हो तो हमें अवश्य दें - धन्यवाद्